भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहां लाखों किसान अपनी मेहनत से अन्न पैदा करके पूरे देश को खिलाते हैं। लेकिन कई इलाकों में कम उत्पादकता, पानी की कमी, क्रेडिट की कमी और पुरानी खेती की विधियां किसानों को परेशान करती रही हैं। इसी चुनौती को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने 2025-26 के संघीय बजट में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PM Dhan-Dhaanya Krishi Yojana – PMDDKY) की घोषणा की। यह योजना उन 100 जिलों पर फोकस करती है जहां कृषि उत्पादकता कम है, फसल की तीव्रता मध्यम है और किसानों को लोन मिलने में दिक्कत होती है। इस योजना से करीब 1.7 करोड़ किसानों को सीधा फायदा पहुंचने की उम्मीद है, खासकर छोटे और सीमांत किसानों, महिलाओं और युवाओं को।
यह योजना नीति आयोग के आकांक्षी जिला कार्यक्रम से प्रेरित है और कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों पर पूरी तरह केंद्रित पहली राष्ट्रीय योजना है। इसका मकसद न सिर्फ फसल उत्पादन बढ़ाना है, बल्कि टिकाऊ खेती, फसल विविधीकरण, पानी और मिट्टी का संरक्षण, जैविक खेती को बढ़ावा देना और किसानों को आत्मनिर्भर बनाना है। आइए, इस योजना की हर पहलू को विस्तार से समझते हैं।
योजना की शुरुआत और पृष्ठभूमि
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2025 को संघीय बजट पेश करते हुए इस योजना का ऐलान किया। बाद में 16 जुलाई 2025 को कैबिनेट ने इसे मंजूरी दी और अक्टूबर 2025 में रबी सीजन से इसे लॉन्च किया गया। योजना की अवधि 6 साल है – 2025-26 से 2030-31 तक। हर साल इसका बजट ₹24,000 करोड़ है, जो कुल ₹1.44 लाख करोड़ बनता है।
यह बजट अलग से नहीं है, बल्कि 11 मंत्रालयों की 36 मौजूदा योजनाओं के कन्वर्जेंस से आता है। इसमें सब्सिडी पर 40%, इंफ्रास्ट्रक्चर (सिंचाई, स्टोरेज) पर 30%, लोन पर 20% और ट्रेनिंग-मार्केट सपोर्ट पर 10% खर्च होगा। राज्य सरकारें और प्राइवेट सेक्टर भी इसमें पार्टनर होंगे।
योजना का नाम “धन-धान्य” बहुत सार्थक है – धन यानी समृद्धि और धान्य यानी अनाज। यह किसानों को समृद्ध बनाने और देश को अनाज में आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प है।
योजना के मुख्य उद्देश्य
PMDDKY के प्रमुख लक्ष्य हैं:
- कृषि उत्पादकता बढ़ाना: कम उपज वाले जिलों में आधुनिक तकनीक, बेहतर बीज और उर्वरक से पैदावार दोगुनी करने का प्रयास।
- फसल विविधीकरण और टिकाऊ खेती: पारंपरिक फसलों के अलावा दालें (पल्सेस), मोटे अनाज (मिलेट्स), फल-सब्जियां और जैविक खेती को प्रोत्साहन। इससे मिट्टी की सेहत सुधरेगी और जलवायु परिवर्तन का मुकाबला आसान होगा।
- सिंचाई और स्टोरेज सुविधाएं: पंचायत और ब्लॉक स्तर पर गोदाम बनाना, माइक्रो-इरिगेशन और जल संरक्षण पर फोकस।
- क्रेडिट की आसान पहुंच: छोटे-लंबे लोन, किसान क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाकर ₹5 लाख करना।
- ट्रेनिंग और मार्केट सपोर्ट: किसानों को नई तकनीक सिखाना, मार्केट लिंकेज और एक्सपोर्ट को बढ़ावा।
खास तौर पर पल्सेस (तुवर, उड़द, मसूर) और मिलेट्स पर जोर है, क्योंकि भारत इनमें आयात पर निर्भर है। योजना के साथ ही “दलहन आत्मनिर्भरता मिशन” भी चल रहा है, जो दालों की पैदावार 350 लाख टन तक ले जाने का लक्ष्य रखता है।
पात्रता और लाभार्थी
यह योजना उन 100 जिलों के किसानों के लिए है जहां:
- कृषि उत्पादकता कम है।
- फसल तीव्रता मध्यम है।
- क्रेडिट एक्सेस कम है।
हर राज्य से कम से कम एक जिला चुना गया है। लाभार्थी मुख्य रूप से:
- छोटे और सीमांत किसान (2 हेक्टेयर से कम जमीन वाले)।
- महिला किसान।
- युवा और भूमिहीन किसान परिवार।
- प्रगतिशील किसान जो दूसरों को ट्रेनिंग दे सकें।
कुल 1.7 करोड़ किसानों को फायदा मिलेगा। पात्रता के लिए आधार कार्ड, भूमि दस्तावेज, बैंक डिटेल्स और आय प्रमाण पत्र जरूरी हो सकते हैं।
योजना के प्रमुख लाभ
इस योजना से किसानों को मिलने वाले फायदे बहुआयामी हैं:
- आर्थिक मदद: सब्सिडी पर बेहतर बीज, उर्वरक, ट्रैक्टर, पंप सेट आदि।
- इंफ्रास्ट्रक्चर: गांव स्तर पर स्टोरेज, जिससे फसल बर्बाद न हो और बेहतर दाम मिले।
- सिंचाई: प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना से जुड़कर ड्रिप इरिगेशन आदि।
- बीमा और लोन: फसल बीमा (PMFBY) और आसान क्रेडिट।
- ट्रेनिंग: डिजिटल डैशबोर्ड से 117 KPIs पर मॉनिटरिंग, लोकल ट्रेनिंग प्रोग्राम।
- मार्केट एक्सेस: e-NAM, कोऑपरेटिव्स से सीधा खरीद और एक्सपोर्ट।
महिला और युवा किसानों को प्राथमिकता मिलेगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई जान आएगी।
कार्यान्वयन की व्यवस्था
योजना को प्रभावी बनाने के लिए तीन स्तर पर समितियां बनी हैं:
- जिला स्तर: जिला धन-धान्य समिति, जिलाधिकारी की अध्यक्षता में। इसमें प्रगतिशील किसान भी शामिल।
- राज्य स्तर: राज्य समिति।
- राष्ट्रीय स्तर: केंद्रीय मंत्रियों और सचिवों की टीम।
हर जिले में “जिला कृषि एवं संबद्ध गतिविधियां योजना” बनेगी, जो लोकल जरूरतों पर आधारित होगी। डिजिटल डैशबोर्ड से मासिक मॉनिटरिंग होगी।
चुनौतियां और भविष्य की संभावनाएं
कोई भी बड़ी योजना चुनौतियों से खाली नहीं होती। पानी की कमी, क्लाइमेट चेंज, छोटी जोतें और मार्केट की अनिश्चितता अभी भी बाधा हैं। लेकिन PMDDKY इनका समाधान कन्वर्जेंस और टेक्नोलॉजी से कर रही है। अगर ठीक से लागू हुई तो 2030 तक ये 100 जिले कृषि के मॉडल बन सकते हैं। दालों और मिलेट्स में आत्मनिर्भरता से आयात बिल कम होगा और न्यूट्रिशन सिक्योरिटी मजबूत।
किसान भाइयों-बहनों, यह योजना सिर्फ सरकारी मदद नहीं, बल्कि आपकी मेहनत को सम्मान देने का माध्यम है। आधुनिक खेती अपनाएं, विविधीकरण करें और मिलेट्स-पल्सेस जैसी पौष्टिक फसलों पर फोकस करें। सरकार आपके साथ है।
निष्कर्ष: धन-धान्य से भरपूर भारत
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना विकसित भारत@2047 की दिशा में एक मजबूत कदम है। यह न सिर्फ किसानों की आय दोगुनी करेगी, बल्कि ग्रामीण भारत को समृद्ध और टिकाऊ बनाएगी। अगर आप इस योजना के तहत आने वाले जिले में हैं, तो लोकल अधिकारी या कृषि विभाग से संपर्क करें और लाभ उठाएं। भारत का किसान मजबूत होगा, तो देश मजबूत होगा। जय जवान, जय किसान!